जागती आँखों से...
Thursday, December 30, 2010
बना
रस
....
सुबह बनारस, शाम बनारस
बेफिक्री का नाम बनारस
कि जिसके पग धोती गंगा
वहीँ सजा श्मशान बनारस
ये धरती वेदों की धरती
देवों का विश्राम बनारस
है धर्मों का संगम स्थल
काश होता हिंदुस्तान बनारस
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