ग़ज़ल .....
वक्त के साथ तो, साया भी बदल जाता है
आज की बात कर, यूँ नज़रें क्यों चुराता है
माफ़ करना मैंने, तुझको पहचाना नहीं
जाने क्यों लगता है, तू मुझे जानता है
जो जानता है तो, ये जानता भी होगा
ये वही शख्स है, तू जिससे पैसे मांगता है
ख़ाक पहचानेगा इस दौर में, जहा देखो
बाप पे बेटा सरेआम, थप्पड़ तानता है
पास जब था तो, कोई बात ना की
चिट्ठियों में ये झूठा प्यार, क्यों जताता है
उम्र एक चीज़ है, जो वैसे भी आ जाएगी
सांझ तो आनी है, तू इसको क्यों बुलाता है