" इक शहर बसता है मुझमें "
कि जब से दूर हुआ हूँ
मैं बंगलूर हुआ हूँ
जुल्म कि ठौर बनूँगा
अब मैं लाहौर बनूँगा
हूँ मैं गंगा के नगर का वाशी
याद आने लगा मुझे काशी
क्यों उड़ाते हो तुम मेरी खिल्ली
खौफ खाओ हूँ मैं नई दिल्ली
बात जब हुई है कोलकाता
एक ही चेहरा है मिथुन' दा जो मुझे भाता
ख्वाब मेरे भी है बनूँ एक सितारा सुरमई
इक बसेरे कि गुज़ारिश है तुझसे मुंबई
जाने क्या देखा था उस नामुराद लड़की में
एक ही बार गया और लूट गया रुड़की में
दोस्त मेरे भी कम नहीं हाँ ज़रा दूर है
मैं बनारस में हूँ तनहा वो गाजीपुर है
क्या किसी और की हुई है सुना है हीर
कौन समझाये था हमारा है हमारा कश्मीर
और सुन देखना जो चाहे तू मुकम्मल दुनिया
बिना पासपोर्ट और वीसा के घूम ले इंडिया
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